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Wednesday, 4 October 2017

अर्धनारीश्वर....लवनीत मिश्र


नर नारी का भेद केवल,
रूप रंग का भेद नहीं।
नर नारी की समानता,
आदर है,कोई खेद नहीं॥

हर नर में निहित है,
नारी सामान संवेदना।
हर नारी में निहित है,
पुरषार्थ की चेतना॥

अर्धनारीश्वर रूप है,
उदाहरण इस रूप का।
सम्मान हो एक दूजे का,
आदर हो इस स्वरूप का॥

अहंकार के जाल में,
उलझा यह समाज है।
पौरुष और नारीत्व का,
भेद ही विनाश है॥

सृष्टि के चक्र का,
यह दोनों आधार हैं।
साथ हों तो मंज़िलें,
पृथक तो बेकार हैं॥

-लवनीत मिश्र

Thursday, 28 September 2017

नर्म कली बेटियाँ......अनहद गुंजन "गूँज"


(घनाक्षरी)
शब्द-शब्द दर्द हार, सुनो मात ये गुहार,
गर्भ में पुकारती हैं, नर्म कली बेटियाँ॥

रोम-रोम अनुलोम, हो न जाए श्वाँस होम,
टूटे न कभी ये स्वप्न, चुलबुली बेटियाँ॥

सृष्टि-सृजन आधार, कल की छिपी फुहार,
शूल सी नहीं हैं होती, पीर पली बेटियाँ॥

तेरा ही अभिन्न अंग, भरो तो नवीन रंग,
बेटों को है देती जन्म, धीर ढली बेटियाँ॥
-अनहद गुंजन "गूँज"