Showing posts with label श्रीमती आशा शैली. Show all posts
Showing posts with label श्रीमती आशा शैली. Show all posts

Friday, 6 October 2017

यूँ न दिल को....श्रीमती आशा शैली

यूँ न दिल को उछालकर चलिए।
रास्ते देख-भालकर चलिए।।

वक़्त की देखिए नज़ाकत को।
ख़ुद को सांचे में ढाल कर चलिए।।

आज आना है उनको महफ़िल में।
आप दिल को सँभालकर चलिए।।

हुस्न की हैं नुमाइशें लगती।
आप ख़ुद को निखार कर चलिए।।

पार जाने की चाह हो दिल में।
नाव दरिया में डालकर चलिए।।

आपसे हम गिला नहीं करते।
आप भी बात टालकर चलिए।
-श्रीमती आशा शैली