यौवन आया
बूढ़े बरगद में
विहंसे पात
ले अंगड़ाई
कलियाँ शरमाई
आया बसंत
स्वर्ण चुनर
ओढ़ वसुधा झूमी
महकी हवा
पीने पराग
तितलियाँ मचली
लगी बौराने
अमराई में
कूक हूक सी लगी
पिक की तान
बासंती पाती
बिखरी बगिया में
मौसम संग
इन्द्रधनुष
उतरा धरा पर
करने सैर
मलज गंध
छेड़े मन के तार
बसंत आया