Showing posts with label शब्द. Show all posts
Showing posts with label शब्द. Show all posts

Monday, 30 October 2017

शब्द

ऐसा लग रहा है
ब्लॉग मे सालों बाद आई हूँ
आती भी नहीं
एक कविता पढ़ी मैं आज...
प्रतिक्रिया लिखते-लिखते 
वहीं रम गई...
आप भी पढ़िए वो प्रतिक्रिया..
जो ढल गई कविता सी...
....................
कौन कहता है
कालातीत हो जाते हैं
शब्द..
नहीं बनते इतिहास कभी
ये शब्द...
मान भी
अपमान भी
व्यंग भी 
और तंज भी
मुखर होते हैं
इन्हीं शब्दों से...
यही वे शब्द हैं
उपयोग किया है
हरिवंश राय ने
शौकत थानवी ने भी
अपनाया इसे...
इन्हीं शब्दों से
हंसाया जग तो
काका हाथरसी ने....
इन्हीं शब्दों को
अपनाएगी
आने वाली पीढ़िया भी
भाषा चाहे जो भी हो...
शब्द, शब्द है
और रहेंगे भी
शब्द ही
इति शुभम्